📚 Issue V | Year III · April 2025 · pp. 1-8

झारखंड प्रदेश में मुण्डारी भाषा और प्रकृति-गीत

डप
डॉ॰ पुष्पा कुमारी
वरीय सहायक प्राध्यापक
Hindi

Abstract

Hindi

प्रकृति और मनुष्य के बीच अभिप्रेरक एवं रागात्मक सम्बन्ध का नाम 'गीत' है। मनुष्य नैसर्गिक रूप से प्रकृति के सानिध्य में भावनात्मक लगाव महसूस करता है जिसे वह अपनी मातृभाषा में लोकगीतों के रूप में लयात्मक अभिव्यक्ति देता है। प्राकृतिक सुषमा से समृद्ध झारखंड प्रदेश में प्रकृतिपूजक जनजाति समुदाय जनजातिय भाषा में विभिन्न रागों में प्रकृति-गीत गाते हैं। उनमें से एक मुण्डारी भाषा बोलनेवाली मुण्डारी जनजाति जदुर, मागे, जपी, गेना आदि रागों में अगहन से बरसात तक विभिन्न अवसरों पर प्रकृति के प्रत्येक रूप से सम्बन्धित लोकगीत गाते हैं। ये प्रकृति गीत उनके प्रकृति-प्रेम का प्रतीक है।

Keywords

मुण्डारी भाषा जनजाति समुदाय लोकगीत प्रकृति रागात्मकता तादात्म्य।

Paper Details

Issue
Issue V | Year III
Published
April 2025
Pages
pp. 1-8
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

डॉ॰ पुष्पा कुमारी. "झारखंड प्रदेश में मुण्डारी भाषा और प्रकृति-गीत." Bundelkhand Vimarsh, Issue V | Year III (April 2025), pp. 1-8. ISSN: 3048-6319.