📚 Issue VI | Year III · August 2025 · pp. 45–51

किरातार्जुनीय महाकाव्य में सन्निहित ज्योतिषशास्त्रीय तत्त्वों का विश्लेषण

मक
महेन्द्र कुमार शर्मा
शोधार्थी
डद
डॉ. देवेश कुमार मिश्र
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय
Hindi

Abstract

Hindi

संस्कृत साहित्य में तीन अत्यन्त विशाल आकृति वाले महाकाव्यों को बृहत्त्रयी की संज्ञा दी गयी है । बृहत्त्रयी में किरातार्जुनीयम्, शिशुपालवधम् एवं नैषधीयचरितम् इन तीन महाकाव्यों को सम्मिलित किया जाता है । बृहत्त्रयी महाकाव्यों में अन्तर्निहित इन तीन महाकाव्यों में से प्रथम किरातार्जुनीय महाकाव्य की रचना महाकवि भारवि ने की है । द्वितीय शिशुपालवध महाकाव्य महाकवि माघ द्वारा विरचित है । अन्तिम नैषधीयचरित महाकाव्य महाकवि श्रीहर्ष द्वारा लिखित है । संस्कृत साहित्य के बृहत्त्रयी काव्यसमूह में कवि भारविकृत किरातार्जुनीय को प्रथम स्थान प्राप्त है । संस्कृत साहित्य के इतिहास में महाकवि कालीदास की वैदर्भी रीति के बाद छठी शताब्दी में एक नई रीति विकसित हुई । पांचाली नामक इस रीति के प्रवर्तक कवि भारवि हैं । इनको संस्कृत साहित्य के प्रौढ कवियों में अन्यतम माना जाता है । भारवि का कवित्व अर्थगौरव के कारण प्रसिद्ध है - ‘भारवेरर्थगौरवम्' । यद्यपि भारवि को मितभाषी समझ जाता है, तथापि यह समझना होगा कि शब्दों में विशिष्ट अर्थ प्रतिष्ठापित करने में वे उतनी ही अधिक शक्ति का प्रयोग करते हैं । इसीलिए किरातार्जुनीय

Keywords

संस्कृत साहित्य महाकाव्य बृहत्त्रयी किरातार्जुनीयम् शिशुपालवधम् नैषधीयचरितम् भारवि माघ।

Paper Details

Issue
Issue VI | Year III
Published
August 2025
Pages
pp. 45–51
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

महेन्द्र कुमार शर्मा, डॉ. देवेश कुमार मिश्र. "किरातार्जुनीय महाकाव्य में सन्निहित ज्योतिषशास्त्रीय तत्त्वों का विश्लेषण." Bundelkhand Vimarsh, Issue VI | Year III (August 2025), pp. 45–51. ISSN: 3048-6319.