📚 Issue VIII | Year IV · April 2026 · pp. 1-15

वास्तुशास्त्र के अनुसार विभिन्न वास्तुदोष

DK
Dr. Krishna Kumar Bhargav
National Sanskrit University Tirupati
Hindi

Abstract

Hindi

वास्तुशास्त्र वासस्थान से संबंधित सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है। वास्तु सिद्धांतों के अनुसार यदि वास स्थान बनाया जाता है तो वह वास्तु सम्मत निर्माण कार्य कहलाता है लेकिन वास्तु सिद्धांतों का अनुपालन यथोचित रूप से नहीं होने से वह निर्माण दोषप्रद होता है । ऐसे ही अनेक दोष वास्तु शास्त्र में दृष्टिगोचर होते हैं जिनका विशेष विचार हमें निर्माण कार्य में करना चाहिए । वास्तु दोषों पर विचार करें तो सबसे पहले गृह निर्माण से पूर्व भूमि के ही विभिन्न प्रकार के दोष बताए गए है जैसे प्लवत्व दोष , भूमि के आकार जन्य दोष, विस्तार संबंधी दोष, शल्य दोष , दिशा के अनुसार अशुभ वृक्ष अर्थात किस दिशा में कौन सा वृक्ष दोष कारक होता है, मुख्य द्वार संबंधी दोष , द्वार वेध दोष ,मर्म वेध दोष, विभिन्न दिशाओं के दोष, मुहूर्तादि दोष । सामान्य रूप से तो कुछ कार्य दिशा विशेष में निषिद्ध बताए ही गए है यथा कभी भी ईशान कोण में शौचालय का निर्माण नहीं होना चाहिए यह प्रमुख दोष होता है । एवं कुछ सामान्य नियम होते है जिनके अनुसार दिशा विशेष का फल सामान्य रहता है अर्थात न ज्यादा शुभ कारक एवं न अधिक हानि कारक इस प्रकार के वच

Keywords

वास्तु दोष प्लवत्व शल्य वेध मर्म अति मर्म ।

Paper Details

Issue
Issue VIII | Year IV
Published
April 2026
Pages
pp. 1-15
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

Dr. Krishna Kumar Bhargav. "वास्तुशास्त्र के अनुसार विभिन्न वास्तुदोष." Bundelkhand Vimarsh, Issue VIII | Year IV (April 2026), pp. 1-15. ISSN: 3048-6319.