हिन्दी साहित्य में कृष्ण काव्यधारा
Abstract
Hindiमध्यकालीन सगुण भक्ति के आराध्य देवताओं में भगवान श्रीकृष्ण का स्थान सबसे महत्त्वपूर्ण है। पुराणों की कथाओं में इनका स्थान सर्वोपरि है। महाभारत में योगेश्वर कृष्ण का राजनीति विशारद महान् योद्धा के रूप में चित्रण किया गया है तथा भागवत पुराण में श्रीकृष्ण की बाल लीला तथा रासलीला का चित्रण है। आचार्य शुक्ल ने श्रीकृष्ण की भक्ति के संबंध में अपने विचार प्रकट किए हैं “जनता पर चाहे जो प्रभाव पड़ा हो पर उक्त गद्दी के भक्त शिष्यों ने सुंदर सुंदर पदों द्वारा जो मनोहर प्रेम संगीत की धारा बहाई, उसने मुरझाते हुए हिन्दू जीवन को सरस और प्रफुल्लित कर दिया। इस संगीत धारा में दूसरे सम्प्रदायों के कृष्णभक्तों ने भी पुरा योग दिया।” कृष्ण भक्ति में कृष्ण का मधुर रूप ही सबके सामने आया और उनका लोकरक्षक और मर्यादा पूर्ण धर्म संस्थापक का चरित्र उद्घाटित नहीं हो पाया। विभिन्न कृष्ण भक्त कवियों ने अपने काव्य के माध्यम से प्रभु की विशद व्याख्या प्रस्तुत की है।
