📚 Issue VI | Year III · August 2025 · pp. 94–101

माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य में वैयक्तिक चेतना और प्रणय-भाव

डप
डॉ॰ पुष्पा कुमारी
वरीय सहायक प्राध्यापक
Hindi

Abstract

Hindi

माखनलाल चतुर्वेदी प्रसिद्ध कवि, नवीनता के पक्षधर गद्यकार, पौराणिक नाटककार, यथार्थवादी कहानीकार और निर्भीक एवं क्रान्तिकारी पत्रकार थे। माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य में वैयक्तिक चेतना और प्रणय-भाव का सुंदर एवं गहन समन्वय मिलता है। माखनलाल चतुर्वेदी मुख्यतः एक कवि हैं। वस्तुतः उनके सभी काव्य-संग्रह राष्ट्रीयता एवं देशभक्ति को समर्पित है, किन्तु समर्पण की एंकातिकता को भंग करते हुए चतुर्वेदीजी की कुछ कविताएं उनकी वैयक्तिक चेतना आर प्रणय-भाव से आप्लावित है। माखनलाल चतुर्वेदीजी का प्रेम सम्बन्धी दृष्टिकोण दूरदर्शी एवं रहस्यात्मक है। त्याग एवं बलिदान की नींव पर आधारित प्रेम अंततः वैयक्तिक चेतना और प्रणय-भाव को स्वयं में आत्मसात कर लेता है।

Keywords

भारतीय आत्मा वैयक्तिक चेतना प्रणय-भाव हिमकरीटिनी समर्पण।

Paper Details

Issue
Issue VI | Year III
Published
August 2025
Pages
pp. 94–101
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

डॉ॰ पुष्पा कुमारी. "माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य में वैयक्तिक चेतना और प्रणय-भाव." Bundelkhand Vimarsh, Issue VI | Year III (August 2025), pp. 94–101. ISSN: 3048-6319.