महर्षि दयानन्द सरस्वती का शिक्षा दर्शन
Abstract
Hindiदयानन्द की मूल्यपरक शिक्षा पद्धति में विविध विषयों का समावेश किया गया है जैसे धर्मपरायणता, नैतिकता, सदाचार, योग, संगीत, ललित-कलाएं, पदार्थ-विज्ञान, कला-कौशल इत्यादि। इसके साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा पद्धति द्वारा राष्ट्रीय भावना, समाज-सुधार एवं लोकोपकार जैसे सद्भावों को भी प्रचारित एवं प्रसारित करने का प्रयास किया। दयानन्द शिक्षा पद्धति वैदिक शिक्षा पद्धति को आधार बनाकर मनुष्य निर्माण एवं जीवनमूल्यों पर विशेष बल देती है। क्योंकि पवित्रता का प्रसार, हृदय-शोधन, चरित्र-निर्माण, व्यक्तित्व का विकास, नागरिकता तथा सामाजिकता का ज्ञान, राष्ट्रीय संस्कृति की सुरक्षा तथा भौतिक उन्नति वैदिक शिक्षा केमुख्य उद्देश्य थे। अत: दयानन्द ने अपनी शिक्षा पद्धति में मानव जीवन से जुड़े हुए सभी विषयों को सम्मिलित करते हुए विद्यार्थियों को ‘आर्य' बनाने का प्रयास किया ताकि वे राष्ट्र के उत्थान में सहयोग कर सकें। स्वामी दयानन्द ने अपने कई ग्रंथों में भारत के गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया है। अंग्रेजों की प्रचलित शिक्षा नीति से आत्मविश्वास खो चुके भारतीयों को जागृत करने हेतु उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों के अनुस
