📚 Issue V | Year III · April 2025 · pp. 1-6

भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति : एक चिंतन

डअ
डॉ अनीता अग्रवाल
अतिथि प्राध्यापक
Hindi

Abstract

Hindi

महिलाओं की स्थिति सदैव एक समान नहीं रही है । समय परिस्थिति एवं वातावरण के परिवर्तन के स्वरूप इनके पद सम्मान एवं प्रतिष्ठा में भी परिवर्तन होता आ रहा है । किसी भी समाज, सभ्यता एवं देश के विकास का मूल्यांकन वहाँ की आधी आबादी अर्थात महिलाओं से किया जाता है । महिलाओं के विकास एवं उनकी प्रास्थित पर हम ध्यान केंद्रित करते है तो दो तथ्य निकल कर सामने आते है, एक यह की प्राचीन काल से लेकर मध्य काल और मध्य काल से लेकर आधुनिक काल तक महिलाओं की स्थिति में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए है । समाज ने कभी सम्मान देकर उन्हें गौरवान्वित किया तो कभी अपमानित कर उसका तिरस्कार किया ।
कुशल गृहिणी, उद्यमी, श्रम शक्ति होने पर भी उनकी क्षमता, प्रतिभा, साहस एवं कार्यों को वह स्थान नहीं दिया गया जो वास्तव में उनका अधिकार है ।3 श्रम की अनदेखी क्षमता का शून्य आँकलन आलोचनाओं की परिपाठियों ने महिलाओं से उनके हक छिन लिए है । सामाजिक तौर पर महिलाओं को त्याग, सहनशीलता व शर्मिलेपन का ताज पहनाया गया है । जिसके भार के तले दबी महिलाओं ने अपने अस्तित्व को भुला दिया । केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के ज्यादातर देशों की मा

Keywords

भारतीय समाज महिला समाज सभ्यता देश विकास मूल्यांकन प्राचीन काल मध्य काल आधुनिक काल कुशल गृहिणी उद्यमी श्रमशक्ति क्षमता प्रतिभा साहस अधिकार त्याग सहनशीलता लज्जा भेदभाव सामाजिक संरचना पितृसत्ता हिंसा सामाजिक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र संघ समानता ।

Paper Details

Issue
Issue V | Year III
Published
April 2025
Pages
pp. 1-6
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

डॉ अनीता अग्रवाल. "भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति : एक चिंतन." Bundelkhand Vimarsh, Issue V | Year III (April 2025), pp. 1-6. ISSN: 3048-6319.