📚 Issue V | Year III · April 2025 · pp. 1-8

वैदिक शिक्षा प्रणालीः सिद्धांत, विधियाँ, समाजिक प्रभाव और उनका ऐतिहासिक विश्लेषण

पक
प्रशान्त कुमार द्विवेदी
शोधार्थी शिक्षा संकाय डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (म.प्र.) ।
डख
डॉ. खुशबू ठाकुर
सहायक शोधकर्त्री महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन (म.प्र.) ।
Hindi

Abstract

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वैदिक शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य जीवन के चार प्रमुख उद्देश्यों (पुरुषार्थ) का पालन करना थाः धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष। यह शिक्षा न केवल धार्मिक और नैतिक शिक्षाओं से जुड़ी थी, बल्कि यह समाज को जीवन के विभिन्न पहलुओं में संतुलन बनाए रखने के लिए तैयार करती थी। वैदिक शिक्षा प्रणाली की सबसे प्रमुख विशेषता थी उसका मौखिक रूप। लेखन की प्रथा उस समय बहुत विकसित नहीं थी, इसलिए वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों का श्रवण (सुनने) और मनन (चिंतन) के माध्यम से अध्ययन किया जाता था। यह शिक्षा गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से दी जाती थी। शिष्य अपनी पूरी शिक्षा की प्रक्रिया में गुरु के साथ रहता था और ज्ञान प्राप्त करता था।
यह शोध पत्र वैदिक शिक्षा के ऐतिहासिक महत्वों, इसके सिद्धांतों, विधियों और समाज पर इसके प्रभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वैदिक शिक्षा के गहरे तत्व जैसे गुरु-शिष्य परंपरा, ध्यान, योग, नैतिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी, आज भी शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में वापस आ रहे हैं। कुछ शैक्षिक संस्थान, विशेष रूप से गुरुकुल शैली के विद्यालय, आज भी वैदिक शिक्षा के सिद्धांतों पर आधारित शिक्षा प्रद

Keywords

वैदिक शिक्षा गुरुशिष्य परंपरा श्रवण मनन वैदिक काल भारतीय सभ्यता भारतीय संस्कृति धर्म समाज शिक्षा विज्ञान कला संगीत योग आयुर्वेद नैतिकता आधुनिक शिक्षा समग्र विकास।

Paper Details

Issue
Issue V | Year III
Published
April 2025
Pages
pp. 1-8
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

प्रशान्त कुमार द्विवेदी, डॉ. खुशबू ठाकुर. "वैदिक शिक्षा प्रणालीः सिद्धांत, विधियाँ, समाजिक प्रभाव और उनका ऐतिहासिक विश्लेषण." Bundelkhand Vimarsh, Issue V | Year III (April 2025), pp. 1-8. ISSN: 3048-6319.