बुन्देलखण्ड में राम
Abstract
Hindiराम भारतीय जनमानस के केंद्र में स्थित वह आदर्श हैं, जिनकी छवि केवल धार्मिक नहीं, अपितु सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक चेतना में भी गहराई से रची-बसी है। भारत के विभिन्न अंचलों में रामकथा की विविध परम्पराएँ हैं, परन्तु बुन्देलखण्ड की भूमि पर राम के प्रति जो श्रद्धा, समर्पण और रचनात्मक ऊर्जा दृष्टिगोचर होती है, वह विशेष महत्व रखती है। बुन्देलखण्ड की कला निधि में चित्रकला का अपना खजाना है। बुन्देलखण्ड की राजधानी रही ओरछा के स्मारकों/मंदिरों के छज्जों/छतों में बने भित्ति चित्र इस कला के अनूठे उदाहरण हैं बुंदेली कलम पर भले ही अनेक आंचलिक कला विधाओं ने कब्जा किया हो परंतु बुंदेली कलम की विविधता उसे जीवित बनाए रखें रही है। दतिया कलम के चित्र बुंदेली चतेवरी के अमिट उदाहरण हैं।
मंदिरों/महलों और चैत्य स्मारकों में बने भित्ति चित्र रामकथा को भी दृष्टि गोचर करते हैं लक्ष्मी नारायण मंदिर ओरछा, दतिया के पारीछत मकबरा तालबेहट, पन्ना ,चंदेरी के मंदिर आदि में बने राम कथा के भित्ति चित्र रामजी के प्रति श्रद्धा भाव और विश्वास के प्रतीक हैं। भित्ति चित्रों के साथ यहाँ के चित्रकारों द्वारा बनाए गए तेल चित
