📚 Issue I | Year I · December 2023 · pp. 1-4

किन्नर साहित्य : लोकसाहित्य के विशेष संदर्भ में

डर
डॉ. रूपाली सारये
Hinid

Abstract

Hinid

किन्नरों की उत्पत्ति के विषय में विचार चर्चा करते हैं तो लोकमत प्रचलित है
कि जब शिव और माता पार्वती ने एकाकार हो कर अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया तो उसी परंपरा
में चलकर उनके अनुयाई स्त्री और पुरुष अर्धनारी श्वर के रूप में इन हिजड़ों की उत्पत्ति हुई देखा जाए तो हिजड़ों के समुदाय में शिव और पार्वती की पूजा अनिवार्य कही गई है वह स्वयं को शिव और पार्वती के अर्धनारी श्वर रूप का ही अवतार मानते हैं ।“किन्नर हिमालय के क्षेत्रों में बसनेवाली एक मनुष्य जाति का नाम है,
जिसके प्रधान केंद्र हिमवत् और हेमहेकूट थे । वर्तमान में किन्नर हिमालय में आधुनिक कन्नोर प्रदेश के पहाड़ी लोगों को कहा जाता है, जिनकी भाषा कन्नौरी , गलचा, लाहौली आदि बोलियों के परिवार की है । आजकल हिजड़ों के लिए भी किन्नर शब्द का प्रयोग किया
है, लेकिन ये जाति आलौकिक और जादुई थी । प्रस्तुत शोधपत्र में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है ।

Keywords

किन्नर शिव और माता पार्वती अर्धनारीश्वर हिमालय हिमवत् हेमहे कूट कन्नौरी गलचा लाहौली ।

Paper Details

Issue
Issue I | Year I
Published
December 2023
Pages
pp. 1-4
Language
Hinid
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

डॉ. रूपाली सारये. "किन्नर साहित्य : लोकसाहित्य के विशेष संदर्भ में." Bundelkhand Vimarsh, Issue I | Year I (December 2023), pp. 1-4. ISSN: 3048-6319.