📚 Issue IV | Year II · December 2024 · pp. 12 - 16

जनकाव्य की चेतना के कवि त्रिलोचन

डर
डॉ. रुपाली सारये
सहायक प्राध्यापक हिंदी तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग देवी अहिल्या विश्वविद्यालय
Hindi

Abstract

Hindi

त्रिलोचन जनकाव्य के धनी थे। प्रकृति और ग्रामीण चेतना उनकी कविताओं की धड़कन है। ‘नगई’ ‘महरा’ ‘चंपा काले अच्छर नहीं चींन्हती’ ‘परदेसी के नाम पर’ ‘सचमुच इधर तुम्हारी याद’ जैसी कविताओं में ग्रामीण एवं नगरी जीवन के परिवेश के प्रक्रिया देखे जा सकती है। अतः यह कहा जा सकता है कि दोनों ही जीवन परिपाटी की बोध अभिव्यक्ति आपके काव्य में दिखाई पड़ती है।

Keywords

त्रिलोचन प्रकृति ग्रामीण चेतना नगई महरा परदेसी अभिव्यक्ति कवि करुणा प्रेम संवेदना ।

Paper Details

Issue
Issue IV | Year II
Published
December 2024
Pages
pp. 12 - 16
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

डॉ. रुपाली सारये. "जनकाव्य की चेतना के कवि त्रिलोचन." Bundelkhand Vimarsh, Issue IV | Year II (December 2024), pp. 12 - 16. ISSN: 3048-6319.