📚 Issue I | Year I · December 2023 · pp. 1-5

हिन्दी उपन्यासों में दिव्यांग विमर्श

कग
किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज झाँसी'
परास्नातक छात्र - हिन्दी विभाग बुंदेलखंड महाविद्यालय झाँसी; बुन्देलखंडी युवा लेखक; सामाजिक कार्यकर्त्ता; पूर्व महासचिव - इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेल हंसराज कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय।
Hindi

Abstract

Hindi

हिन्दी उपन्यासों में दिव्यांग विमर्श की शुरूआत प्रेमचंद के रंगभूमि उपन्यास से सन 1924 में होती है। रंगभूमि का नायक सूरदास है, जोकि दिव्यांग है और काशी के पास में बसे पांडेपुर गाँव का रहने वाला है। ऐसा माना जाता है कि प्रेमचंद को उपन्यास में नायक सूरदास के सृजन की प्रेरणा गाँव के अंधे भिखारी से मिली थी। 21 वीं सदी में समकालीन विमर्श के परिदृश्य में दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए हिन्दी साहित्य में एक नए विमर्श - 'विकलांग विमर्श' का प्रवर्तन समकालीन विमर्शों की धरती बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में साहित्यमनीषी, भाषाविद और आलोचक डॉ० विनय कुमार पाठक जी ने किया है। हिन्दी उपन्यासों में कथासम्राट प्रेमचंद के 'रंगभूमि' उपन्यास से लेकर समकालीन उपन्यास 'इनबॉक्स' में दिव्यांग - जीवन की मुखर अभिव्यक्ति हुई है। इन उपन्यासों ने दिव्यांगों के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनकी परिस्थितियों और उनके जीवन संघर्षों को बेबाकी से उठाया है इसलिए इन उपन्यासों की दिव्यांग - सशक्तिकरण की दशा और दिशा में उल्लेखनीय भूमिका है।

Keywords

दिव्यांग दिव्यांग विमर्श विकलांग विमर्श दिव्यांग सशक्तिकरण 21वीं सदी समकालीन विमर्श हिन्दी उपन्यास रंगभूमि अनामदास का पोथा खंजन नयन ज्यों मेहंदी के रंग इनबॉक्स।

Paper Details

Issue
Issue I | Year I
Published
December 2023
Pages
pp. 1-5
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज झाँसी'. "हिन्दी उपन्यासों में दिव्यांग विमर्श." Bundelkhand Vimarsh, Issue I | Year I (December 2023), pp. 1-5. ISSN: 3048-6319.